About Raja Jajwalyadev

सन १०४५ के आस – पास कमलराज के पुत्र प्रथम रत्नराज सिहासन पर बैठे । उन्होंने बंजु वर्मा की पुत्री नोनल्ला से विवाहकिया और यहीं से कलचुरी वंशियों का प्रभाव छत्तीसगढ़ में स्थापित हुआ । रत्नराज के पुत्र ने मणिपुर को विकसित करके रत्नपुर दिया और उसे अपनी राजधानी बनाई । ‘ रत्नपुर ‘ इअ समय बिलासपुर जिले का रतनपुर है ।
सन १०६५ के आस – पास रत्नदेव प्रथम पुत्र पृथ्विदेव राजसिहासन पर बैठे । पृथ्विदेव की रानी राजल्ला से जो पुत्र उत्पन्न हुआउसका नाम जाजल्यदेव रखा गया । जाजल्यदेव मेधावी,पराक्रमी ,दूरदर्शी एवं महत्वकांक्षी राजा थे । उन्होंने अपना राज्य छेत्रनागवंशी सोमेश्वर को पराजित कर चित्रकोट(बस्तर ) तक फैलाया । ओड़िसा ,स्वर्णपुर तथा बंगाल का मिदनापुर भी जीता ।जाजल्यदेव की कीर्ति तथा यश चरों तरफ फैली । उन्होंने अपने को त्रिपुरी की प्रभु सत्ता से अलग कर लिया । सोने ,तांबे के सिक्केजरी करवाए ,जिस पर अपना नाम खुदवाया । गज ,शार्दुल तथा हनुमान की आकृति बनवाई । यही आगे चलकर कल्चुलिरियों काप्रतीक चिन्ह बना । जाजल्यदेव ने अपने नाम से जाजल्यदेव नमक नगर बसाया था , जो आज जांजगीर कहलाता है । शिलालेखोमें एक तलब तथा उसके आस पास आम्र कुंजों का उल्लेख भी है । राजा जाजल्यदेव ने अनेक मंदिरों का जीर्णोधार करवायाजिसमे पाली का शिव मंदिर प्रमुख है ।
पाली का शिव मंदिर

जांजगीर विष्णुमन्दिर

जांजगीर के विष्णुमन्दिर का निर्माण इन्ही के द्वारा हुआ था ।  इसी अपूर्ण मन्दिर का शिल्प देखने लायक है । इसके दीवारों पर दशावतार ,की मूर्तियाँ खिंचित है । किन्नरियों एवं स्त्रियों की प्रतिमा भी है  । पश्चिम दीवाल की पीठ पर सूर्यदेव विराजमान हैं और मंदिर के ऊपर ब्रम्हा , विष्णु और महेश की मूर्तियाँ है ।

इनमे से विष्णु की मूर्ति नवग्रहों के बीच में स्थित है । मंदिर एक विशाल भीमा तलाब  किनारे अपूर्ण और मुर्तिविहिन  दशा में खड़ा है । संभवतः अधूरे निर्माण का कारन इनमे मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा नहीं करना है ।

 जाजल्यदेव की रानी से लाछ्ल्ला के गर्भ से द्वितीय रत्नदेव का जन्म हुआ । जो ११२० में गद्द्दी पर बैठे । राजा जाजल्यदेव ने अपने कार्यकाल में अनेक प्रजाहितकारी कार्य किये ।  मंदिरों का जीर्णोधार , तालाबों ,बावडियों , कुओं का निर्माण कराया तथा अनेक गाँव में आम्रकुज लगवाए तथा विविध प्रकार के वृच्छों का रोपड़  कराया । ऐसे महान  रजा के नाम पर छत्तीसगढ़ शासन ने नगर के नवीन कन्या महाविद्यालय का नाम ‘ जाजल्यदेव नवीन कन्या महाविद्यालय रखा है ।

अभिभावकों ,साहित्यकारों ,बुध्धि जीविओं से अनुरोध है के वे छात्राओं को प्रवेश लेने हेतु प्रेरित करें । ताकि शासन की मंशा पूरी हो सके और नगर तथा आस – पास की छात्राएं इस महाविद्यालय का समुचित लाभ उठा सकें ।